शून्य शांति शपथ क्षणिक
शुरू अंत काल्पनिक
शाम हुई आँख खुली
शूल शब्द सूली
सुबह सवेरा हैं कथित
खुली धुप मनगढ़ित
शाश्वत है अँधेरा
दुःख दर्द डेरा
हवा पानी आग से
धुएं और भाप से
रक्षा करे बसेरा
काटे वही डेरा
खून और आग को
बकरी और बाघ को
पंछी का पिंजरा
लागे ये डेरा
Thursday, December 30, 2010
सत्ताखोरी
ऊँट पटांग ऊँट की टांग
पकड़ा मुर्गा, निकली बाँग.
पर क्यूँ पकडे हम मुर्गे को?
पड़े रहो सब पीकर भांग.
बाँग लगी तो पोल खुलेगी,
ऊपर तक सबकी नींद खुलेगी,
मुर्गा बन जायेगा बकरा,
बलि एक, दोषी सत्रह.
तो इससे पहले कि बात बढे,
लोगों को कोई भनक पड़े,
मुर्गे के मुंह मारो पैसा,
सब चुपचाप, सब फिर वैसा.
वैसे भी सब खाते हैं,
मुहबोली वो पाते हैं.
चौंकने कि क्या है वजह,
प्रजा वैसी जैसा राजा.
[Translation for all angrez peepal]
[Translation for all angrez peepal]
Sattakhore
Patang camel camel's leg
Caught cock crow turned out.
Why we caught on to chicken?
Have all be drinking hemp.
Crow began to open the poll,
To open up everyone's sleep,
Cock will become a goat,
Sacrifice a convicted seventeen.
So before you point increased,
People have no clue,
Die mouth of chicken money
All quiet like that all over again.
It is all to eat
Mauhboli find it.
Chauncne that's why,
People like that as king . ]
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