शून्य शांति शपथ क्षणिक
शुरू अंत काल्पनिक
शाम हुई आँख खुली
शूल शब्द सूली
सुबह सवेरा हैं कथित
खुली धुप मनगढ़ित
शाश्वत है अँधेरा
दुःख दर्द डेरा
हवा पानी आग से
धुएं और भाप से
रक्षा करे बसेरा
काटे वही डेरा
खून और आग को
बकरी और बाघ को
पंछी का पिंजरा
लागे ये डेरा
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