काले अँधेरे में भी, काली आँखें दिख जाती हैं,
काले अँधेरे में ही, रौशनी जगमगाती है I
काली उँगलियों में सुनहरी, बांसुरी झिलमिलाती है,
काली जमुना के तेज़ पर, अदभुत राग ये सजाती है.
काली कमर पर ही पीला, अपना पीलापन पाता है,
काले पैरों के ही तलवों पर, लाल लाल हो पाता है.
काले हाथों में ही तो, कोरा माखन उजलाता है,
काले मुख पर ही मोर पंख, चका चौंध फैलता है.
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